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2018 जन्माष्टमी त्यौहार दिनांक, मुहूर्त Delhi, कथा और इतिहास

2018 जन्माष्टमी त्यौहार दिनांक

कब है 2018 में जन्माष्टमी  2 सितंबर, 2018 (रविवार)
पूजा मुहूर्त:  23:58:25 से 24:43:35 तक New Delhi, India
अवधि :  45 मिनट

पारणा मुहूर्त : 19:21:52 के बाद 3 सितंबर को

आप पारणा में जल पीकर भी व्रत समाप्त कर सकते हैं।

2018 जन्माष्टमी त्यौहार दिनांक

जन्माष्टमी का यह पवन त्यौहार श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, उत्तर प्रदेश के मथुरा गांव में मामा कंस के कारागृह में माता देवकी की आठवीं संतान के रूप में भगवान कृष्णा ने भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी को जन्म लिया था। तभी से इस दिन को कृष्णा जन्माष्टमी के रूप एमए पुरे भारत वर्ष में बड़े धूम धाम से मनाया जाता है!

विस्तार में कथा श्री कृष्णा जन्माष्टमी!

उग्रसेन मथुरा के राजा थे और मथुरा राज्य में राज करते थे और उग्रसेन के पुत्र का नाम कंस था!  जब कसं ने राज्य संभाला तब कंस से अपने पिता उग्रसेन को सीहासन से जबरन उतारकर कारावास में दाल दिआ! तब कंस की बहन देवकी का विवाह यादवो के कुल के वासुदेव से सुनिश्चित हो गया था! जब विवाह के बाद कंस अपनी बहन देवकी को विदा करने के लिए रथ के साथ उन्हें छोड़ने जा रहा था तब एक आकाशवाणी हुई जिसमे पता चला की जिस देवकी को तू विदा कर रहा हे उसी का आंठवा पुत्र तेरे विनाश का कारन होगा! तभी आकाशवाणी सुनकर कंस क्रोध की ज्वाला में भड़क गया और उसके मन में अपनी मृत्यु को लेके देवकी को मारने का ख्याल आया और उसने सोचा के अगर में देवकी को ही मार दू तो उसका पुत्र ही नहीं होगा और में अजर हो जाऊंगा.

तब वासुदेव जी ने कंस को समझाया और कंस से कहा तुम्हे मेरी धरम पत्नी देवकी से कोई दर नहीं है उसके आठवे पुत्र से है इसलिए में तुम्हे अपनी आठवीं संतान दे दूंगा फिर कंस ने यह बात स्वीकार कर ली और दोनों को कारागार में दाल दिआ!

जन्माष्टमी कथा

तभी श्री नारद जी वहाँ पहुँचे और कंस से कहा कि यह कैसे पता चलेगा कि आठवाँ गर्भ कौनसा होगा। गिनती पहले से शुरू होगी या अंतिम से। कंस ने नारद जी के परामर्श पर देवकी के गर्भ से उत्पन्न होने वाले समस्त बालकों को एक-एक करके मार दिया।

भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में भगवान् श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। उनके जन्म लेते ही जेल की काल कोठरी में अद्भूद प्रकाश फैल गया। वासुदेव-देवकी के सामने शंख, चक्र, गदा एवं चतुर्भुज भगवान ने अपना रूप प्रकट करके कहा, अब में नन्हे बालक का रूप धारण कर रहा हु। तुम मुझे इसी क्षण गोकुल में नन्द के यहाँ पहुँचा दो और उनकी अभी जन्मी कन्या को लेकर कंस को सौंप दो। वासुदेव जी ने तब वैसा ही किया और नन्द की कन्या को लेकर कंस को ला कर दे दिया।

और जब कन्या को कंस ने मारने की कोशिश की तो कन्या आकाश में उड़ गई और देवी का रूप धारण कर बोली मुझे मारने से तेरी मृत्यु समाप्त नहीं होगी तुजे मारने वाला गोकुल पहुंच चूका है! यह बात सुनकर कंस बहुत ही व्याकुल हो गया! तब जैसा की आप सभी जानते ही है कंस से भगवन श्री कृष्णा को मरने के लिए अनेक राक्षश और दैत्य भेजे पर श्री कृष्णा ने अपनी माया से सबको मार डाला और बड़े होकर कंस को मारकर उग्रसेन को उनकी राजगद्दी पर बैठाया!